Sampat Singh ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी सरकार पर 2025-26 के बजट में भारी वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए। Indian National Lok Dal के राष्ट्रीय संरक्षक ने दावा किया कि सरकार ने सैकड़ों घोषणाएं तो कीं, लेकिन उन पर खर्च नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि बजट में कुल 729 घोषणाएं की गई थीं, जिनमें से करीब 300 योजनाओं पर ₹7500 करोड़ खर्च होना था, लेकिन 31 मार्च 2026 तक इन पर एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। उनके अनुसार, उनके पास 25 फरवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े मौजूद हैं, जो इस स्थिति को दर्शाते हैं।
संपत सिंह ने कई विभागों के उदाहरण देते हुए कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास जैसी अहम योजनाओं में भारी राशि आवंटित होने के बावजूद खर्च शून्य रहा। कृषि आधारभूत ढांचे के लिए ₹406 करोड़, ग्रामीण विकास के लिए ₹890 करोड़, स्वच्छ भारत मिशन के तहत ₹248 करोड़ और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ₹357 करोड़ तक खर्च नहीं किए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हुआ और कुछ मामलों में खर्च बेहद कम रहा। इसी तरह मनरेगा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय और कौशल विकास जैसी योजनाओं में भी खर्च काफी कम या शून्य बताया गया।
संपत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार “कहती कुछ और करती कुछ” है और सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास पर्याप्त राजस्व होने के बावजूद उसे विकास कार्यों के बजाय अन्य उद्देश्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत वे संबंधित वित्तीय संस्थाओं और राज्यपाल तक पहुंचाएंगे। साथ ही किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मंडियों में फसल बेचने में दिक्कतें आ रही हैं और नई प्रक्रियाओं से किसानों को परेशानी हो रही है।
यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आना बाकी है।

